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हमारा असली मार्गदर्शन गुरू के द्वारा भी होता है

 रामू काका की उँगलियाँ पुराने रेडियो के नॉब को घुमाने में माहिर थीं। उनके हाथ झुर्रियों से भरे थे, लेकिन उनमें एक अजीब सी स्थिरता थी, जैसे वे हवा में तैरती तरंगों को महसूस कर सकते हों। वे पिछले बीस सालों से गाँव के पुराने डाकघर के बगल में अपनी छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे, जहाँ उनका काम सिर्फ चाय बनाना नहीं, बल्कि शहर से आने वाली खबरों को सही लहजे में सुनाना था। उनकी आँखों पर मोटा चश्मा टिका रहता था, जो अक्सर उनकी नाक के नीचे सरक जाता था।


उसी दुकान की एक पुरानी लकड़ी की बेंच पर बैठे माधव अपनी डायरी में कुछ हिसाब लिख रहे थे। उनके बगल में उनका दस साल का बेटा, आरव, अपनी छोटी सी नोटबुक में कुछ आड़ी-तिरछी लकीरें खींच रहा था। बाहर हल्की धूप थी और सड़क पर इक्का-दुक्का साइकिलें गुजर रही थीं। पिता और पुत्र के बीच एक सहज शांति थी, जिसे केवल चाय के बर्तनों की खनखनाहट तोड़ रही थी। आरव ने अचानक पेंसिल रोकी और अपने पिता की ओर देखा, उसकी आँखों में एक गहरी जिज्ञासा थी जो अक्सर बच्चों में तब आती है जब वे दुनिया के किसी बड़े रहस्य को समझने की कोशिश करते हैं।


"पिताजी, लोग कहते हैं कि सफलता केवल मेहनत से मिलती है, तो फिर कुछ लोग बहुत मेहनत करके भी वहीं खड़े रहते हैं जहाँ से उन्होंने शुरू किया था?" आरव का सवाल साधारण था, लेकिन उसमें एक गहरा तर्क था। माधव ने अपनी डायरी बंद की और एक लंबी सांस ली। उन्होंने अपने बेटे के सिर पर हाथ रखा और मुस्कुराए। उन्होंने महसूस किया कि आरव अब सिर्फ कहानियों से संतुष्ट नहीं होने वाला था; वह जीवन के वास्तविक आधार को खोजना चाहता था।


माधव ने धीमी और शांत आवाज़ में कहा, "बेटा, मेहनत तो वह बीज है जिसे हर कोई बोता है, लेकिन उस बीज को सही दिशा में उगाने के लिए जिस खाद और पानी की ज़रूरत होती है, वह मार्गदर्शन ही असली कुंजी है। जैसे बिना नक्शे के जंगल में चलना सिर्फ थकान देता है, वैसे ही बिना गुरु के जीवन में संघर्ष तो बहुत होता है, पर मंज़िल का पता नहीं चलता। जीवन की सच्ची सफलता केवल धन या पद पाना नहीं है, बल्कि उस सत्य मार्ग को पहचानना है जो हमें भीतर से शांत और संतुष्ट कर दे।"


आरव ने ध्यान से सुनते हुए पूछा, "तो क्या इसका मतलब है कि सतगुरु के बिना हम कभी सही रास्ता नहीं खोज पाएंगे?" माधव ने उसकी आँखों में देखते हुए जवाब दिया, "हो सकता है कि तुम खुद भी कुछ रास्ता खोज लो, लेकिन एक गुरु वह रोशनी है जो उन अंधेरों को भी उजागर कर देती है जिन्हें हम देख ही नहीं पाते। जब हम किसी पूर्ण गुरु के दर्शन करते हैं, तो हमें न केवल सफलता का मार्ग मिलता है, बल्कि यह समझ भी आती है कि उस सफलता का उपयोग दूसरों के भले के लिए कैसे करना है। सत्य मार्ग पर चलना कठिन है, और इस कठिन मार्ग पर केवल एक सतगुरु ही हमें गिरने से बचा सकते हैं और सही दिशा दिखा सकते हैं।"


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