प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण के साथ जिस तरह “परसीमन” (Delimitation) की बात जोड़ी जा रही है, वह कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, यदि बिना जातीय जनगणना के परसीमन किया जाता है, तो इससे सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है और कई वर्गों की वास्तविक भागीदारी कम हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर जातीय आंकड़ों को नजरअंदाज कर सीटों के पुनर्गठन की तैयारी कर रही है, जिससे चुनावी समीकरण अपने पक्ष में बनाए जा सकें। प्रियंका गांधी ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और समान प्रतिनिधित्व बेहद जरूरी है, और इस तरह के फैसलों से जनता का विश्वास कमजोर हो सकता है।
साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है, लेकिन इसके लिए सही और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि महिलाओं को वास्तविक अधिकार तभी मिलेंगे, जब सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और नीतियां पूरी पारदर्शिता के साथ लागू हों।