पितृ दोष से डरने की जरूरत नहीं, इसे ठीक करने की जरूरत है। आपकी किताब के अनुसार पितृ दोष 3 कारणों से बनता है - 1. पितरों का श्राप 2. नागों का श्राप 3. गौ हत्या का दोष। और हर दोष का उपाय ज्योतिर्लिंग से जुड़ा है।
उपाय 1 - त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक) - सबसे पावरफुल
किताब में साफ लिखा है, अगर कुंडली में राहु-गुरु की युति है, यानी गुरु चांडाल दोष है, तो ये नागदोष वाला पितृ दोष है। इसका एक ही काट है - त्र्यंबकेश्वर में त्रिपिंडी श्राद्ध और कालसर्प पूजा। भागवत पुराण में नागों के राजा शेषनाग की कथा इसी से जुड़ी है। हर साल सावन में यहाँ पूजा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
उपाय 2 - रामेश्वरम में पिंडदान
सूर्य से बना पितृ दोष, जब सूर्य 9वें भाव में राहु से पीड़ित हो, तो ये राजा के श्राप वाला दोष है। श्रीराम ने भी अपने पिता दशरथ के लिए रामेश्वरम में ही पिंडदान किया था। इसलिए आप भी अमावस्या पर दक्षिण दिशा में मुंह करके, काले तिल और गंगा जल से अपने पितरों को जल दें।
उपाय 3 - लाल किताब का अचूक उपाय
आपकी किताब में लाल किताब के अनुसार बहुत सरल उपाय है। अगर 5वें घर में राहु है तो -
- घर में चांदी का ठोस हाथी रखें
- पीपल के पेड़ पर हर शनिवार जल चढ़ाएं
- घर की नैऋत्य दिशा में पीपल का पौधा लगाएं
ये उपाय राहु को शांत करता है जो पितृ दोष का मुख्य कारक है।
उपाय 4 - गाय और कौवे की सेवा
सबसे आसान और रोज का उपाय। सुबह पहली रोटी गाय को, आखिरी रोटी कुत्ते को और दोपहर में कौवे को भोजन दें। गीता में कहा गया है, कौवा यमराज का प्रतीक है और गाय में 33 करोड़ देवी-देवता हैं। ऐसा करने से पितर तृप्त होते हैं।
उपाय 5 - भागवत पुराण का महामंत्र
हर अमावस्या को "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" का 108 बार जाप करें और पीपल के नीचे घी का दीया जलाएं। सरवार्थ चिंतामणि कहती है, पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास है।
न्यूमैरोलॉजी टिप: जिनका ड्राइवर नंबर 8, 4 या 9 है, उनको शनिवार को शनि मंदिर में सरसों का तेल दान जरूर करना चाहिए।
याद रखें, पितृ दोष पाप नहीं, कर्ज है। और कर्ज सेवा से ही चुकता होता है।