वैदिक ज्योतिष में कुंडली का छठा भाव (6th House) ऋण (कर्ज), रोग और शत्रुओं का भाव माना जाता है। कई बार व्यक्ति कड़ी मेहनत करता है, लेकिन फिर भी वह कर्ज के जाल में उलझता चला जाता है। यदि कुंडली के छठे भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव हो या छठे भाव का स्वामी पीड़ित हो, तो व्यक्ति को अकारण कर्ज लेना पड़ता है या लिया हुआ कर्ज समय पर चुकाना कठिन हो जाता है।
यदि आप भी काफी समय से आर्थिक तंगी या कर्ज की समस्या से परेशान हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में छठे भाव को संतुलित करने और कर्ज मुक्ति के कई सरल व प्रभावी उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार ला सकते हैं।
कर्ज से मुक्ति पाने के 5 असरदार ज्योतिषीय उपाय:
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा: मंगलवार का दिन कर्ज मुक्ति के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करें या हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाकर सिंदूर अर्पित करें।
मंगलवार के दिन नया कर्ज न लें: शास्त्रानुसार मंगलवार के दिन कभी भी नया कर्ज नहीं लेना चाहिए, क्योंकि इस दिन लिया गया कर्ज लंबे समय तक नहीं चुकता। हालांकि, इस दिन पुराने कर्ज की किश्त (EMI) चुकाना शुभ माना जाता है।
उत्तर दिशा को रखें स्वच्छ: घर या दुकान की उत्तर दिशा (धन कुबेर की दिशा) में कभी भी कबाड़ या भारी सामान न रखें। इस स्थान को साफ और खुला रखने से धन आगमन के नए रास्ते खुलते हैं।
गाय और पक्षियों की सेवा: रोज सुबह पहली रोटी गाय को खिलाएं और पक्षियों को दाना-पानी दें। यह छोटा सा अभ्यास छठे भाव के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है और कर्ज से राहत दिलाता है।
तिजोरी की सही दिशा: अपने धन या तिजोरी को घर के दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में रखें और उसका दरवाजा उत्तर दिशा की ओर खुलना चाहिए। इससे धन संचित होता है और फिजूलखर्ची रुकती है।
जब आप इन उपायों को श्रद्धा और निरंतरता के साथ अपनाते हैं, तो आपकी कुंडली के छठे भाव का दोष दूर होने लगता है और आर्थिक बाधाएं समाप्त होती हैं।
निष्कर्ष
कर्ज केवल आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव भी पैदा करता है। सही ज्योतिषीय उपायों, सकारात्मक सोच और सही कर्म के साथ प्रयास करने से आप जल्द ही कर्ज से मुक्त होकर एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।